Quraan Majid Padhne Ki Fazilat क़ुरआन शरीफ पढ़ने की फ़ज़ीलत Quraan Sharif Padhne Ki Fazilat in Hindi : अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह वबरकाताहु नाजरीन आज हम आपको बताएँगे की रोजाना घर में कीरान मजीद पढ़ने से क्या होता है और उसके फ़ज़ीलत किया है इन सब बातो को जानेंगे और इस पर इन्शाह अल्लाह अमल भी करेंगे हमारी हर मोमिन और मोमिना से दरखास्त है गुजारिश है की आप हर रोज अपने घरो में क़ुरआन मजीद की तिलावत करें और दुसरो से भी करवाएं इससे आपके घरों में इन्शाह अल्लाह बरकत व किसी तरह की परिशानी से निजात बना रहेगा ऐसे और इस्लामिक जानकारी के लिए हमेशा GOOGLE पर www.hindistate.com को सर्च करें|
Quraan Padhne Ki Fazilat
बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम
(1) रोजाना क़ुरआन करीम पढ़ने की फ़ज़ीलत क्या है हदीस शरीफ में आया है की नबी करीम (S.A.W) ने फ़रमाया है की रोज क़ुरआन पढ़ा करो वो इस लिए की यही क़ुरआन क़यामत के दिन क़ुरआन की तिलावत करने वालों की शफ़ाअत करने के लिए आएगा |
(2) हदीस क़ुदसी में आया है की अल्लाह तआला फरमाते है जिस शख्स को कुरआन करीम की तिलावत करने याद करने गौर फ़िक्र करने और तर्जुमा तकसीर वगैरह करने की मशगुलियत और मसरूफियत ने मेरा जिक्र करने और मुझसे दुआएं मांगने से रोक दिया यानि जिक्र और दुआ मांगने की फुर्सत न मिली तो मई उस शख्स को उससे बढ़कर देता हूँ जो मई दुआएं और जरुरत मंदो को मांगने वालो को देता हूँ यानी के उनकी साड़ी दुआएं जरूरतों और मुरादों को पूरा कर देता हूँ |
और हमारे नबी करीम (S.A.W) ने फ़रमाया अल्लाह के कलाम को और तमाम कलामों पर ऐसे ही फ़ज़ीलत और बड़ाई हासिल है जैसी खुद अल्लाह तआला को अपने तमाम मख़लूक़ात पर है |
(3) एक और हदीस में आया है की नबी करीम SAW ने फ़रमाया है की क़ुरआन सीखो और सिखाओ और उसको पढ़ो और पढ़ाओ वो इस लिए की क़ुरआन की मिशाल उस शख्स के बारे में है की जिसने क़ुरआन सीखा और उसका ज्ञान हासिल किया फिर उसको पढ़ा और दुसरो को भी पढ़ाया और उस पर अमल भी किया और ख़ास कर तहज्जुद के नमाज़ में पढ़ा ऐसे है जैसे मुश्क से भरी हुई एक मुंह खुली थैली जिसकी महक हर जगह पहुँचती है |
क़ुरआन पढ़ने का सवाब
और उस शख्स के हक़ में जो कुरआन को सीखता तो है और उसको क़ुरआन का ज्ञान भी हासिल करता है मगर रात को को गाफिल पड़ा सोता रहता है न वो तहज्जुद में नमाज़ पढता है और न उस पर अमल करता है हालाँकि उसके दिल में कुरआन मौजूद है और सही सलामत है ठीक वैसे ही जैसे एक मुश्क से भरी थैली जिसका मुंह कस कर बाँध दिया गया हो|
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